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गुनगुनाना चाहता हूँ

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गज़ल गाना चाहता हूँ ,गुनगुनाना चाहता हूँ
ग़ज़ल का ही ग़ज़ल में सन्देश देना चाहता हूँ
ग़ज़ल मरती है नहीं बिश्बास देना चाहता हूँ
गज़ल गाना चाहता हूँ ,गुनगुनाना चाहता हूँ

ग़ज़ल जीवन का चिरंतन प्राण है या समर्पण का निरापरिमाण है
ग़ज़ल पतझड़ है नहीं फूलों भरा मधुमास है
तृप्ती हो मन की यहाँ ऐसी अनोखी प्यास है
ग़ज़ल के मधुमास में साबन मनाना चाहता हूँ
गज़ल गाना चाहता हूँ ,गुनगुनाना चाहता हूँ

ग़ज़ल में खुशियाँ भरी हैं ग़ज़ल में आंसू भरे
या कि दामन में संजोएँ स्वर्ण के सिक्के खरे
ग़ज़ल के अस्तित्ब को मिटते कभी देखा नहीं
ग़ज़ल के हैं मोल सिक्कों से कभी होते नहीं
ग़ज़ल के दर्पण में ,ग़ज़लों को दिखाना चाहता हूँ

गज़ल गाना चाहता हूँ ,गुनगुनाना चाहता हूँ
ग़ज़ल दिल की बाढ़ है और मन की पीर है
बेबसी में मन से बहता यह नयन का तीर है
ग़ज़ल है भागीरथी और ग़ज़ल जीवन सारथी
ग़ज़ल है पूजा हमारी ग़ज़ल मेरी आरती
ग़ज़ल से ही स्बांस की सरगम बजाना चाहता हूँ
गज़ल गाना चाहता हूँ ,गुनगुनाना चाहता हूँ

प्रस्तुति :
मदन मोहन सक्सेना

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68 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

mrssarojsingh के द्वारा
February 20, 2014

बहुत ही सुंदर कविता लिखी है आपने सक्सेना जी …… बधाई स्वीकार करें …….

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 21, 2014

    धन्यवाद. आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला – हार्दिक धन्यवाद

mrssarojsingh के द्वारा
February 20, 2014

बहुत ही सुंदर ग़जल लिखी है आपने सक्सेना जी . बधाई स्वीकार करें ……..

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 21, 2014

    हार्दिक धन्यवाद

mrssarojsingh के द्वारा
February 20, 2014

बहुत सुंदर ग़जल लिखी है आपने सक्सेना जी … बधाई स्वीकार करें …

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 21, 2014

    सुखद एहसास की अनुभूति हुई आपकी उपस्थिति मात्र से और आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला – हार्दिक धन्यवाद

October 20, 2013

बहुत sundar

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 21, 2013

    आप का बहुत शुक्रिया होंसला अफजाई के लिए

meenakshi के द्वारा
October 19, 2013

गुनगुनाना चाहता हूँ बहुत सुन्दर गज़ल लिखी है -ये पंक्ति मुझे ख़ास लगी -” ग़ज़ल दिल की बाढ़ है और मन की पीर है” बहुत -2 शुभकामनाएं मदन जी आपको ! मीनाक्षी श्रीवास्तव

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 21, 2013

    आप का बहुत शुक्रिया

meenakshi के द्वारा
October 19, 2013

गुनगुनाना चाहता हूँ बहुत सुन्दर गज़ल लिखी है -ये पंक्ति मुझे ख़ास लगी -” ग़ज़ल दिल की बाढ़ है और मन की पीर है” बहुत -2 शुभकामनाएं मदन जी आपको ! Meenakshi Srivastava

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 21, 2013

    शुक्रिया ,होंसला अफजाई के लिए

meenakshi के द्वारा
October 19, 2013

‘गुनगुनाना चाहता हूँ’ बहुत सुन्दर गज़ल लिखी है -ये पंक्ति मुझे ख़ास लगी -” ग़ज़ल दिल की बाढ़ है और मन की पीर है” बहुत -2 शुभकामनाएं मदन जी आपको ! Meenakshi Srivastava

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 21, 2013

    शुक्रिया .

deepakbijnory के द्वारा
October 18, 2013

बहुत खूब

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 18, 2013

    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .आभार .

udayraj के द्वारा
August 30, 2013

बहुत खुब । दिल में बसाना चाहता हूं , आपके लिए इक गजल गाना चाहता हूं ।।

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 30, 2013

    शुभकामनाएं.ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 2, 2013

    ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.हार्दिक शुभकामनाएं.

bdsingh के द्वारा
August 24, 2013

गजल के व्दारा खुशी और गम को प्रभावपूर्ण ढंग से व्यक्त किया जाता ै। गजल की सार्थकता को सुन्दर ढंग से व्यक्त किया है आपने

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 26, 2013

    सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है .प्रोत्साहन के लिए आपका हृदयसे आभार .

आदित्य जी के द्वारा
August 23, 2013

शब्दों को लय के धागे में यूँ आपने पिरोया है जैसे किसी के सजीव सपनों को हृदय में संजोया है अत्सुन्दर भावाभिव्यक्ति श्री राधेकृष्ण जी!

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 26, 2013

    ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .

harirawat के द्वारा
August 21, 2013

सक्सेनाजी बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति है ! दिल तक को हिला देती हैं ऐसी गजलें ! ये कुदरत का उपहार है आपको, साधुवाद कहना चाहता हूँ, गजल आपकी गुनगुनाना चाहता हूँ ! हरेन्द्र जागते रहो

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 22, 2013

    प्रोत्साहन के लिए आपका हृदयसे आभार .सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है .

yogi sarswat के द्वारा
August 13, 2013

ग़ज़ल पतझड़ है नहीं फूलों भरा मधुमास है तृप्ती हो मन की यहाँ ऐसी अनोखी प्यास है ग़ज़ल के मधुमास में साबन मनाना चाहता हूँ गज़ल गाना चाहता हूँ ,गुनगुनाना चाहता हूँ ग़ज़ल में खुशियाँ भरी हैं ग़ज़ल में आंसू भरे या कि दामन में संजोएँ स्वर्ण के सिक्के खरे ग़ज़ल के अस्तित्ब को मिटते कभी देखा नहीं ग़ज़ल के हैं मोल सिक्कों से कभी होते नहीं ग़ज़ल के दर्पण में ,ग़ज़लों को दिखाना चाहता हूँ बहुत सुन्दर श्री मदन मोहन जी !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    बहुमूल्य सन्देश के लिए आप का तहे दिल से हार्दिक आभार

omdikshit के द्वारा
August 13, 2013

आदरणीय सक्सेना जी, बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    रचना पसंद करने और बहुमूल्य सन्देश के लिए आप सभी का तहे दिल से हार्दिक आभार

Jaishree Verma के द्वारा
August 12, 2013

ग़ज़ल को बहुत ही सुन्दर शब्दों में ढाला है आपने मदन मोहन सक्सेना जी ! बधाई !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद . सुखद एहसास की अनुभूति हुई आपकी उपस्थिति मात्र से और आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला

Nikhil के द्वारा
August 11, 2013

मैं भी आपके संग-संग गुनगुनाना चाहता हूँ मदन जी. अनुपम. बधाई

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    सुखद एहसास की अनुभूति हुई आपकी उपस्थिति मात्र से और आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला .मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .

yamunapathak के द्वारा
August 11, 2013

बहुत सुन्दर मदन जी प्रत्येक पंक्ति सुन्दर और भावपूर्ण है साभार

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .सुखद एहसास की अनुभूति हुई आपकी उपस्थिति मात्र से और आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला

Jaishree Verma के द्वारा
August 11, 2013

ग़ज़ल के साथ गुंथी सुंदर भावनाएं,Madan Mohan saxena जी !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    सुखद एहसास की अनुभूति हुई आपकी उपस्थिति मात्र से और आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला

Jaishree Verma के द्वारा
August 11, 2013

ग़ज़ल को बहुत ही सुंदर शब्दों में पिरोया है आपने Madan Mohan saxena जी !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

Jaishree Verma के द्वारा
August 11, 2013

ग़ज़ल,सुंदर शब्दों में गूंथी हुई रचना Madan Mohan saxena जी !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद

yogi sarswat के द्वारा
August 10, 2013

ग़ज़ल में खुशियाँ भरी हैं ग़ज़ल में आंसू भरे या कि दामन में संजोएँ स्वर्ण के सिक्के खरे ग़ज़ल के अस्तित्ब को मिटते कभी देखा नहीं ग़ज़ल के हैं मोल सिक्कों से कभी होते नहीं ग़ज़ल के दर्पण में ,ग़ज़लों को दिखाना चाहता हूँ गज़ल गाना चाहता हूँ ,गुनगुनाना चाहता हूँ ग़ज़ल दिल की बाढ़ है और मन की पीर है बेबसी में मन से बहता यह नयन का तीर है ग़ज़ल है भागीरथी और ग़ज़ल जीवन सारथी ग़ज़ल है पूजा हमारी ग़ज़ल मेरी आरती ग़ज़ल से ही स्बांस की सरगम बजाना चाहता हूँ गज़ल गाना चाहता हूँ ,गुनगुनाना चाहता हूँ \बहुत बढ़िया

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .

yogi sarswat के द्वारा
August 10, 2013

ग़ज़ल में खुशियाँ भरी हैं ग़ज़ल में आंसू भरे या कि दामन में संजोएँ स्वर्ण के सिक्के खरे ग़ज़ल के अस्तित्ब को मिटते कभी देखा नहीं ग़ज़ल के हैं मोल सिक्कों से कभी होते नहीं ग़ज़ल के दर्पण में ,ग़ज़लों को दिखाना चाहता हूँ गज़ल गाना चाहता हूँ ,गुनगुनाना चाहता हूँ ग़ज़ल दिल की बाढ़ है और मन की पीर है बेबसी में मन से बहता यह नयन का तीर है ग़ज़ल है भागीरथी और ग़ज़ल जीवन सारथी ग़ज़ल है पूजा हमारी ग़ज़ल मेरी आरती ग़ज़ल से ही स्बांस की सरगम बजाना चाहता हूँ गज़ल गाना चाहता हूँ ,गुनगुनाना चाहता हूँ बहुत खूब श्री मदन मोहन जी !

yogi sarswat के द्वारा
August 10, 2013

ग़ज़ल में खुशियाँ भरी हैं ग़ज़ल में आंसू भरे या कि दामन में संजोएँ स्वर्ण के सिक्के खरे ग़ज़ल के अस्तित्ब को मिटते कभी देखा नहीं ग़ज़ल के हैं मोल सिक्कों से कभी होते नहीं ग़ज़ल के दर्पण में ,ग़ज़लों को दिखाना चाहता हूँ गज़ल गाना चाहता हूँ ,गुनगुनाना चाहता हूँ ग़ज़ल दिल की बाढ़ है और मन की पीर है बेबसी में मन से बहता यह नयन का तीर है ग़ज़ल है भागीरथी और ग़ज़ल जीवन सारथी ग़ज़ल है पूजा हमारी ग़ज़ल मेरी आरती ग़ज़ल से ही स्बांस की सरगम बजाना चाहता हूँ गज़ल गाना चाहता हूँ ,गुनगुनाना चाहता हूँ क्या बात है ! बहुत खूब श्री मदन मोहन जी

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद .

August 9, 2013

ग़ज़ल है भागीरथी और ग़ज़ल जीवन सारथी ग़ज़ल है पूजा हमारी ग़ज़ल मेरी आरती ग़ज़ल से ही स्बांस की सरगम बजाना चाहता हूँ गज़ल गाना चाहता हूँ ,गुनगुनाना चाहता हूँ बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति .badhai madan ji .

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    सुखद एहसास की अनुभूति हुई आपकी उपस्थिति मात्र से और आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला.मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .

yatindrapandey के द्वारा
August 9, 2013

हैलो सर सुन्दर रचना बनी है ग़ज़ल जीवन का चिरंतन प्राण है या समर्पण का निरापरिमाण है ग़ज़ल पतझड़ है नहीं फूलों भरा मधुमास है तृप्ती हो मन की यहाँ ऐसी अनोखी प्यास है ये पंक्तिया बेहद पसंद आई

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला.मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .

Jaishree Verma के द्वारा
August 9, 2013

बेहद खूबसूरत पंक्तियाँ ग़ज़ल पर !बहुत खूब मदन मोहन सक्सेना जी !

Jaishree Verma के द्वारा
August 9, 2013

ग़ज़ल पर बेहद खूबसूरत पंक्तियाँ !बहुत खूब मदन मोहन सक्सेना जी !

Jaishree Verma के द्वारा
August 9, 2013

ग़ज़ल पर बेहद सुन्दर पंक्तियाँ ,गुनगुनाने योग्य !बहुत खूब मदन मोहन सक्सेना जी !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला. बहुत बहुत धन्यवाद .

Ritu Gupta के द्वारा
August 8, 2013

ग़ज़ल में खुशियाँ भरी हैं ग़ज़ल में आंसू भरे या कि दामन में संजोएँ स्वर्ण के सिक्के खरे ग़ज़ल के अस्तित्ब को मिटते कभी देखा नहीं ग़ज़ल के हैं मोल सिक्कों से कभी होते नहीं ग़ज़ल के दर्पण में ,ग़ज़लों को दिखाना चाहता हू अति ऊतम रचना

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .सुखद एहसास की अनुभूति हुई आपकी उपस्थिति मात्र से और आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला

Ritu Gupta के द्वारा
August 8, 2013

ग़ज़ल में खुशियाँ भरी हैं ग़ज़ल में आंसू भरे ग़ज़ल में खुशियाँ भरी हैं ग़ज़ल में आंसू भरे या कि दामन में संजोएँ स्वर्ण के सिक्के खरे ग़ज़ल के अस्तित्ब को मिटते कभी देखा नहीं ग़ज़ल के हैं मोल सिक्कों से कभी होते नहीं ग़ज़ल के दर्पण में ,ग़ज़लों को दिखाना चाहता हूँ अति उत्तम रचना बधाई हो

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 20, 2013

    आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला.बहुत बहुत धन्यवाद

Sushma Gupta के द्वारा
August 7, 2013

माननीय मदन मोहन जी , आपने गजल के लिए बहुत ही सुन्दर अल्फाज व्यक्त कियें हैं, ऐसे ही लिखते रहियेगा .. साभार .

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 7, 2013

    प्रोत्साहन के लिए आपका हृदयसे आभार .

Sushma Gupta के द्वारा
August 7, 2013

माननीय मदन मोहन जी , आपने गजल के लिए बहुत ही सुन्दर अल्फाज व्यक्त कियें हैं, ऐसे ही लिखते रहियेगा .. साभार ..

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 7, 2013

    आपकी प्रतिक्रिया मिली बहुत अच्छा लगा।धन्यवाद !.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
August 5, 2013

ग़ज़ल में खुशियाँ भरी हैं ग़ज़ल में आंसू भरे या कि दामन में संजोएँ स्वर्ण के सिक्के खरे ग़ज़ल के अस्तित्ब को मिटते कभी देखा नहीं ग़ज़ल के हैं मोल सिक्कों से कभी होते नहीं ग़ज़ल के दर्पण में ,ग़ज़लों को दिखाना चाहता हूँ बहुत खूब मदन भाई जी …सुन्दर शब्दों से सजी गजल की महिमा में चार चाँद लगाते अच्छी गजल ….गुनगुनाने को मन करता है ….बधाई भ्रमर 5

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 6, 2013

    बहुत शुक्रिया होंसला अफजाई के लिए.

rastogikb के द्वारा
August 5, 2013

अश्रु लिखते रहे गीत मेरे सदा। वो पैरो से अपने मिटाते रहे।।

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 6, 2013

    आप का बहुत शुक्रिया होंसला अफजाई के लिए.

meenakshi के द्वारा
August 5, 2013

राजेश जी विभिन्न भावों को दर्शाती – आपकी ग़ज़ल ..सुन्दर है गुनगुना लीजिये … बहुत -२ बधाई ! मीनाक्षी श्रीवास्तव

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 6, 2013

    Thanks Meenakshi srivastavaji for comment but My name is Madan not rajesh.


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