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हे ईश्वर

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हे ईश्वर
आखिर तू ऐसा क्यूँ करता है अशिक्षित ,गरीब ,सरल लोग
तो अपनी ब्यथा सुनाने के लिए
तुझसे मिलने के लिए ही आ रहे थे
बे सुनाते भी तो भला किस को
आखिर कौन उनकी सुनता ?
और सुनता भी
तो कौन उनके कष्टों को दूर करता ?
उन्हें बिश्बास था कि तू तो रहम करेगा
किन्तु
सुनने की बात तो दूर
बह लोग बोलने के लायक ही नहीं रहे
जिसमें औरतें ,बच्चें और कांवड़िए भी शामिल थे
जो कात्यायनी मंदिर में जल चढ़ाने जा रहे थे
क्योंकि उनका बिश्बास था कि
सावन का आखिरी सोमवार होने से शिब अधिक प्रसन्न होंगें।
कभी केदार नाथ में तूने सीधे सच्चें लोगों का इम्तहान लिया
क्योंकि उनका बिश्बास था कि चार धाम की यात्रा करने से
उनके सभी कष्टों का निबारण हो जायेगा।
और कभी कुम्भ मेले में सब्र की परीक्षा ली
क्योंकि उनका बिश्बास था कि गंगा में डुबकी लगाने से
उनके पापों की गठरी का बोझ कम होगा
उनको क्या पता था कि
भक्त और भगबान के बीच का रास्ता
इतना काँटों भरा होगा
हे इश्वर
आखिर तू ऐसा क्यों करता है।
उने क्या पता था कि
जीबन के कष्ट से मुक्ति पाने के लिए
ईश्वर के दर पर जाने की बजाय
आज के समय में
चापलूसी , भ्रष्टाचार ,धूर्तता का होना ज्यादा फायदेमंद है
सत्य और इमानदारी की राह पर चलने बाले की
या तो नरेन्द्र दाभोलकर की तरह हत्या कर दी जाती है
या फिर दुर्गा नागपाल की तरह
बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
हे इश्वर
आखिर तू ऐसा क्यों करता है।

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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
August 28, 2013

बहुत ही मुखर भावाभिव्यक्ति ईश्वर की बनाई दुनिया उसी के हाथों खत्म होती है.ईश्वर कष्ट दे तो उसे सहन करने की क्षमता भी दे बस जब तक जीवन हो अपने लिए प्रभु के द्वारा निरधारित कार्य करते जाना है यही जन्म मृत्यु की शश्वता है. साभार

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 29, 2013

    हार्दिक शुभकामनाएं.ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

sunitasharma के द्वारा
August 27, 2013

बहुत ही सुन्दर् स्तुति सर ,सादर नमस्कार !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 27, 2013

    ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ..सुखद एहसास की अनुभूति हुई आपकी उपस्थिति मात्र से और आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला

jlsingh के द्वारा
August 27, 2013

बहुत ही अच्छी भाव-अभिव्यक्ति हे ईश्वर !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 27, 2013

    ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .

vaidya surenderpal के द्वारा
August 26, 2013

विचारोत्तेजक सुन्दर रचना…।

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 27, 2013

    कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाए.ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

seemakanwal के द्वारा
August 23, 2013

सुन्दर रचना आभार .

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 26, 2013

    आपका हृदयसे आभार .

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 26, 2013

    बहुत धन्यवाद .सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है.

seemakanwal के द्वारा
August 23, 2013

चापलूसी , भ्रष्टाचार ,धूर्तता का होना ज्यादा फायदेमंद है सत्य और इमानदारी की राह पर चलने बाले की या तो नरेन्द्र दाभोलकर की तरह हत्या कर दी जाती है या फिर दुर्गा नागपाल की तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। हे इश्वर आखिर तू ऐसा क्यों करता है। सार्थक रचना

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 26, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद

deepakbijnory के द्वारा
August 22, 2013

इतनी उदासी क्यों भले लोग आज भी हैं बस मीडिया उनको कवर नहीं करता है १% बुराई ९९% भलाई पर हावी हो जाती है

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 23, 2013

    ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .सुखद एहसास की अनुभूति हुई आपकी उपस्थिति मात्र से और आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला

meenakshi के द्वारा
August 21, 2013

मदन जी, ऊपर वाले की बनायी दुनिया , उसी के हाथों चलती है – वो सर्वज्ञ है – और हम अल्पज्ञ. अत: हम जो देखतें हैं , सुनते समझतें हैं , वो हमारी निगाह से अन्याय ..गलत लगता है ..पर वो… तो सर्वज्ञ हैं न ? आपने वास्तव में बहुत मार्मिक रचना की है . मीनाक्षी श्रीवास्तव

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 22, 2013

    प्रोत्साहन के लिए आपका हृदयसे आभार .

adityaupadhyay के द्वारा
August 21, 2013

सर,अच्छा लेख है…..पर मैं मानता हूँ कि ,माना ईस्वर कि यह स्रष्टि है,किन्तु यहाँ अब नियम कानून हमारे हो चुके है…और इन्द्रियों का नियंत्रण हमारा सारा समाज खो चुका है…और जहाँ यह सब होना लाज़मी है…आप के विचार जानना चाहूँगा….धन्यवाद

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 22, 2013

    सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है .ऊपर वाले की बनायी दुनिया , उसी के हाथों चलती है – वो सर्वज्ञ है – और हम अल्पज्ञ. अत: हम जो देखतें हैं , सुनते समझतें हैं , वो हमारी निगाह से अन्याय ..गलत लगता है ..पर वो… तो सर्वज्ञ हैं न ?

harirawat के द्वारा
August 21, 2013

मदन मोहन जी आपकी भावनाओं की मैं कद्र करता हूँ, और यही सवाल मैं भी भगवान से सदा सबेरे सबेरे पूछता हूँ ! लेकिन मेरा एक विशवास भी है की वे एक दिन इसका सार्थक जबाब जरूर देंगे क्यों की वे सर्व व्यापक घाट घाट वासी हैं ! अच्छी रचना के लिए बधाई ! हरेन्द्र जागते रहो !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 22, 2013

    प्रोत्साहन के लिए आपका हृदयसे आभार. सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है .ऊपर वाले की बनायी दुनिया , उसी के हाथों चलती है – वो सर्वज्ञ है – और हम अल्पज्ञ. अत: हम जो देखतें हैं , सुनते समझतें हैं , वो हमारी निगाह से अन्याय ..गलत लगता है ..पर वो… तो सर्वज्ञ हैं न ?

harirawat के द्वारा
August 21, 2013

मदन मोहन जी आपकी भावनावों की मैं कद्र करता हूँ, मैं भी ईश्वर से यही सब कुछ पूछता हूँ ! लेकिन सक्सेना जी ईश्वर चाहता है की उनका भक्त मीरा जैसे हो जो भक्ती में अपने तन मन की सुधी भी भूल जाय, जिसको पता ही नहीं की वह जहर पी रही है या पानी ! हम कबीर, रैदास भी तो नहीं बन सकते, जैसे राखी साईं ये सब कुछ तो तेरा है ! हाँ एक बात जरूर है की सत्य मेव जयते, वह कब होगी इसका इन्तजार आपको भी करना पडेगा मैं आज तक कर रहा हूँ, लेकिन मुझे उसकी सता पर पूरा भरोषा है ! अच्छी रचना के लिए साधुवाद ! हरेन्द्र जागते रहो !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 22, 2013

    आपकी प्रतिक्रिया से संबल मिला.बहुत बहुत धन्यवाद


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