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शिक्षा शिक्षक और हम

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शिक्षा शिक्षक और हम
आज शिक्षक दिवस है
यानि
भारत के पूर्व राष्ट्रपति और दार्शनिक तथा शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनका जन्मदिन
प्रश्न है कि आज शिक्षक दिबस की कितनी जरुरत है
शिक्षक लोग आज के दिन
बच्चों से मिले तोहफे से खुश हो जाते हैं
और बच्चे शिक्षक को खुश देख कर खुश हो जातें हैं
शिक्षा का मतलब सिर्फ जानकारी देना ही नहीं है
जानकारी और तकनीकी गुर का अपना महत्व है
लेकिन बौद्धिक झुकाव और लोकतांत्रिक भावना का भी महत्व है
इन भावनाओं के साथ छात्र उत्तरदायी नागरिक बनते हैं
जब तक शिक्षक ,शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध नहीं होगा
तब तक शिक्षा को अपना उद्देश्य नहीं मिल पायेगा
हमारी संस्कृति में
शिक्षक और गुरु का दर्जा तो भगवान से भी ऊपर माना गया है
लेकिन
आज का गुरु गुरु कहलाने लायक है इस पर प्रश्नचिह्न हैं
कितने ही गुरु ऐसे हैं जिन पर घिनौने अपराधों के आरोप लगे हुए हैं
शिक्षक भी गुरु के पद से तो उतर ही चुका है
अब वह शिक्षक भी रह पाएगा इसमें संदेह है
परिणाम ये हुआ है कि
आज न तो छात्रों के लिए कोई शिक्षक
उनका आर्दश , उनका मार्गदर्शक गुरू और जीवनभर की प्रेरणा बन पाता है
और न ही शिक्षक बनने को उत्सुक भी हैं
बही घिसी पिटी शिक्षा प्रणाली को उम्र भर खुद ढोता है
और छात्रों की पीठ पर लादता हुआ
एक शिक्षक
अब इस आस में कभी नहीं रहता कि उसका कोई छात्र
देश और समाज के निर्माण में कोई बडी सकारात्मक भूमिका निभाएगा
सवाल ये कि इन सब के लिए कौन जिम्मेदार है
शिक्षक , शिक्षा ब्यबस्था या समाज
शिक्षक को जिस सम्मान से देखा जाना चाहियें
जो सुबिधाएं शिक्षक को मिलनी चाहियें ,क्या मिल रहीं हैं
अगर नहीं
तो आज के भौतिक बादी युग में कौन शिक्षक बनना चाहेंगा
यदि शिक्षक संतुष्ट नहीं रहेगा
तो हमारे बच्चों का भबिष्य क्या होगा
देश सेबा में उनका कितना योगदान होगा
और हम किस दिशा में जा रहें हैं
समझना ज्यादा मुश्किल नहीं हैं।

शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामना :

प्रस्तुति :
मदन मोहन सक्सेना

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

neerusriv के द्वारा
September 28, 2013

‘ शिक्षा शिक्षक और हम ‘ने समाज मैं ब्याप्त सच्चाई को खोल कर प्रस्तुत किया है ,बहुत सुन्दर लेखनी.धन्यवाद

sumit Madan के द्वारा
September 11, 2013

अच्छी बात कही है।

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 11, 2013

    मेरे ब्लौग आप का स्वागत है.धन्यवाद .

bhanuprakashsharma के द्वारा
September 8, 2013

सुंदर अभिव्यक्ति। बधाई। 

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 9, 2013

    सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है.धन्यवाद

ushataneja के द्वारा
September 7, 2013

अति सुंदर प्रस्तुति! हे ईश्वर! हर शिक्षक को ‘सच्चा शिक्षक’ बनाना|

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 8, 2013

    धन्यवाद .सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है.

meenakshi के द्वारा
September 6, 2013

बिलकुल सच कहा – हमारे यहाँ ” शिक्षको ” के लिए स्तर को हर प्रकार से उच्चकोटि की सुविधाएं देनी चाहिए – जिससे अधिक -से अधिक लोग इस दिशा में अपने कदम बढ़ाये – तभी देश सही मायने में आगे बढेगा – मात्र कुछ पैसे व मेडल / चिह्न देने से .. बात नहीं बनेगी . मीनाक्षी श्रीवास्तव

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 6, 2013

    सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है

Jaishree Verma के द्वारा
September 6, 2013

आज समाज बड़े ही असमंजस के माहौल से गुजर रहा है ,कुछ पता ही नहीं की किस पर विश्वास किया जाए और किस पर नहीं ,न तो आज गुरु ही विश्वसनीय रहे और न शिष्य ही ! विचारणीय लेख मदन मोहन सक्सेना जी !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 6, 2013

    सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है.धन्यवाद .

bdsingh के द्वारा
September 6, 2013

विचारणीय बिषय,आपने रखा है।

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 6, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद .

bdsingh के द्वारा
September 6, 2013

बढ़ते उपभोगवाद और गिरता नैतिक स्तर इससे लगभग हर  वर्ग प्रभावित।  नैतिक पतन समाज की अनेक बुराईयों का आधार  तैयार करती है।

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 6, 2013

    धन्यवाद . सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है


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