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मेरी कुछ क्षणिकाएँ

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मेरी कुछ क्षणिकाएँ

एक :
संबिधान है
न्यायालय है
मानब अधिकार आयोग है
लोकतांत्रिक सरकार है
साथ ही
आधी से अधिक जनता
अशिक्षित ,निर्धन और लाचार है .

दो:
कृषि प्रधान देश है
भारत भी नाम है
भूमि है ,कृषि है, कृषक हैं
अनाज के गोदाम हैं
साथ ही
भुखमरी, कुपोषण में भी बदनाम है .

तीन:

खेल है
खेल संगठन हैं
खेल मंत्री है
खेल पुरस्कार हैं
साथ ही
खेलों के महाकुम्भ में
पदकों की लालसा में सौ करोड़ का भारत भी देश है .

मदन मोहन सक्सेना.

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jaishree Verma के द्वारा
September 12, 2013

जब तक हमारे देश में भ्रष्टाचार का दानव फल – फूल रहा है , हमारे देश को भुखमरी ,कुपोषण , अशिक्षा से नहीं बचाया जा सकता ! विचारणीय प्रस्तुति मदन मोहन सक्सेना जी !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 12, 2013

    सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है.धन्यवाद .

Jaishree Verma के द्वारा
September 12, 2013

जी हाँ , मदन मोहन सक्सेना जी ! हमारे देश में सब कुछ होते हुए भी हम भूख ,गरीबी ,अशिक्षा से जूझते रहते हैं ,क्योंकि हमारे यहाँ भ्रष्टाचार का दानव पलता ,फलता ,फूलता है ! सुंदर अभिव्यक्ति , बधाई !

Mudassar Imam के द्वारा
September 11, 2013

१. समझने की फुर्सत नहीं है लोगों को २.सोचने की ताक़त नहीं है नेता को ३.इधर देखने की ज़रुरत नहीं देश के ठीकेदारों को ४, इन सब से मतलब नहीं कुर्सी हकदारों को ५, हम और आप ही इज्ज़त देते हैं इन गद्दारों को . बहुत ही सही कहा आपने शुक्रिया deartellme2006@yahoo.co.in

nishamittal के द्वारा
September 11, 2013

सुन्दर प्रस्तुति आपकी लेखनी से बधाई


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