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ग़ज़ल (सेक्युलर कम्युनल)

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जब से बेटे जबान हो गए
मुश्किल में क्यों प्राण हो गए

किस्से सुन सुन के संतों के
भगवन भी हैरान हो गए

आ धमके कुछ ख़ास बिदेशी
घर बाले मेहमान हो गए

सेक्युलर कम्युनल के चक्कर में
गाँव गली शमसान हो गए

कैसा दौर चला है अब ये
सदन कुश्ती के मैदान हो गए

बिन माँगें सब राय दे दिए
कितनों के अहसान हो गए

प्रस्तुति:
ग़ज़ल (सेक्युलर कम्युनल)

मदन मोहन सक्सेना

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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

madhav79awana के द्वारा
February 7, 2014

बहुत खूब भाई साहिब,वर्त्तमान ज़िन्दगी और समाज का बहुत सुन्दर चित्रण किया है आपने ,बधाई.

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 7, 2014

    मेरे ब्लौग आप का स्वागत है ,, आभार

vivek pandey के द्वारा
January 4, 2014

सेक्युलर कम्युनल के चक्कर में गाँव गली शमसान हो गए….. बहुत सुन्दर पंक्तिया…..

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    January 6, 2014

    सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है , आभारी हूँ !

harirawat के द्वारा
December 19, 2013

वाह क्या खूब मनमोहन जी, जिदगी की असलियत को रस भरी कविता के छंद से सजा कर परोस दिया आपने पाठकों के सामने ! बधाई ! मेरे ब्लॉग पर आने का बहुत बहुत धन्यवाद !

bhanuprakashsharma के द्वारा
September 22, 2013

सुंदर अभिव्यक्ति, बधाई। 

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 23, 2013

    तहेदिल से शुक्रिया . बहुमूल्य प्रतिक्रिया देने के लिए

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
September 20, 2013

सुन्दर व सटीक ग़ज़ल ! बधाई !!

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 22, 2013

    तहेदिल से शुक्रिया मेरी इस रचना को अपना समय देने के लिए एवं अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया देने के लिए ..

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
September 20, 2013

सुन्दर व सटीक ग़ज़ल ! बधाई स्वीकारें !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 22, 2013

    तहेदिल से शुक्रिया . बहुमूल्य प्रतिक्रिया देने के लिए ..

Pradeep Kesarwani के द्वारा
September 18, 2013

बहुत सुन्दर पंक्तिया शुभकामनाये

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
September 17, 2013

सच लिखा है आपने .आभार

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 18, 2013

    आप का तहेदिल से शुक्रिया मेरी इस रचना को अपना समय देने के लिए एवं अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया देने के लिए … स्नेह युहीं बनायें रखें … सादर !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 18, 2013

    आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
September 17, 2013

sach bahut hi bura haal hai .sarthak prastuti

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 18, 2013

    तहेदिल से शुक्रिया मेरी इस रचना को अपना समय देने के लिए एवं अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया देने के लिए . सादर !

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 17, 2013

सेक्युलर कम्युनल के चक्कर में गाँव गली शमसान हो गए अच्छी रचना ..कमेन्ट नहीं जा पा रहा है भ्रमर ५

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 18, 2013

    आप का तहेदिल से शुक्रिया बहुमूल्य प्रतिक्रिया देने के लिए … स्नेह युहीं बनायें रखें … सादर !

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 17, 2013

सेक्युलर कम्युनल के चक्कर में गाँव गली शमसान हो गए प्रिय मदन जी तीखे व्यंग्य सहित ,,,समसामयिक दर्द व्यक्त करती अच्छी रचना काश पढ़ सुन आँखें खुलें लोगों की अब भी सुन्दर भ्रमर ५

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 18, 2013

    तहेदिल से शुक्रिया मेरी इस रचना को अपना समय देने के लिए एवं अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया देने के लिए … स्नेह युहीं बनायें रखें … सादर !

seemakanwal के द्वारा
September 17, 2013

चुटीली रचना ,आभार .

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    September 18, 2013

    स्नेह युहीं बनायें रखें … सादर !तहेदिल से शुक्रिया मेरी इस रचना को अपना समय देने के लिए एवं अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया देने के लिए …


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