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सोच पर तरस

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सोच पर तरस

तरस आता है
मुझे उन लोगों की सोच पर
जो लोग आंतकबादी की पहचान भी धर्म से करने लगते हैं
और
संतों के दुराचरण में भी
हिन्दू धर्म और सनातन धर्म को बीच में ले आते हैं
धर्म लोगों को
आपस में मिलजुल कर रहने की सीख देता है
आतंक ,यौनाचार
करने बाला सिर्फ
मानबता का अपराधी है
उसका कोई धर्म नहीं होता है

प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepakbijnory के द्वारा
October 18, 2013

ग गागर me saagar bhar diya

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 18, 2013

    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .आशा है आगे भी आपका आशीर्वाद मेरी रचनाओं को मिलता रहेगा .आभार .

deepakbijnory के द्वारा
October 18, 2013

sunder rachna gagar me sagar bhar diya

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 18, 2013

    आभार. मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद . .

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
October 15, 2013

तीन शब्दों का नाम ,तीन शब्दों में कहा सब कुछ ,,,बहुत खूब वाह  क्या कहने

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 15, 2013

    दिल से आपका धन्यबाद .

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
October 15, 2013

तीन शब्दों का नाम मेरा ,तीन शब्दों में कहा सब कुछ ,,,बहुत खूब वाह  क्या कहने

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 15, 2013

    तहे दिल से आपका धन्यबाद .

Bhagwan Babu 'Shajar' के द्वारा
October 11, 2013

सही कहा आपने…

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 14, 2013

    धन्यबाद आपका तहे दिल से

kantagogia के द्वारा
October 11, 2013

यह तो सत्य है मदन जी | फिर भी हमारे समाज में लोगों की आँखों पर अन्धविश्वास की काली पट्टी बंधी है वो मानने को तैयार ही नहीं होते की धरम की आड़ में शोषण का आसान रास्ता अपना रखा है साधुयों ने |

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 14, 2013

    आपका आभार . मेरे ब्लॉग पर आने के लिए .

bdsingh के द्वारा
October 11, 2013

सही कहा आपने- आतंक,दुराचार करने वाला मानवता का अपराधी। (भ्रमित करता धर्म-तन्त्र) पर समय देने काकण्ट करें।

bdsingh के द्वारा
October 11, 2013

सही कहा आपने- आतंक,दुराचार करने वाला मानवता का अपराधी। (भ्रमित करता धर्म-तन्त्र)

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 14, 2013

    आपका आभार .


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