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प्यार की ख्वाहिश

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प्यार की ख्वाहिश

गर कोई हमसे कहे की रूप कैसा है खुदा का
हम यकीकन ये कहेंगे जिस तरह से यार है

संग गुजरे कुछ लम्हों की हो नहीं सकती है कीमत
गर तनहा होकर जीए तो बर्ष सो बेकार है

सोचते है जब कभी हम क्या मिला क्या खो गया
दिल जिगर साँसें हैं अपनी पर न कुछ अधिकार है

याद कर सूरत सलोनी खुश हुआ करते हैं हम
प्यार से बह दर्द दे दें तो हमें स्वीकार है

जिस जगह पर पग धरा है उस जगह खुशबु मिली है
अब नाम लेने से ही अपनी जिंदगी गुलजार है

ये ख्वाहिश अपने दिल की है की कुछ नहीं अपना रहे
क्या मदन इसको ही कहते लोग अक्सर प्यार है

मदन मोहन सक्सेना

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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
November 27, 2013

दिल को खुश कर देनेवाली रचना ! मदन जी, बधाई !!

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    November 27, 2013

    आपकी उत्साह बढ़ाने वाली प्रतिक्रिया मिली बहुत अच्छा लगा। धन्यवाद !

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
October 26, 2013

sundar bhavabhivyakti .badhai

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 28, 2013

    आपकी प्यार भरी, उत्साह बढ़ाने वाली प्रतिक्रिया मिली बहुत अच्छा लगा। धन्यवाद !

Bhagwan Babu 'Shajar' के द्वारा
October 24, 2013

बहुत सुन्दर रचना है मदन भैया…. बधाई…

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 25, 2013

    आपकी प्रतिक्रया हेतु शुभकामनाओं सहित हार्दिक साभार ,धन्यबाद

meenakshi के द्वारा
October 23, 2013

मदन जी बहुत सुन्दर ये पंक्ति लाज़वाब – “अब नाम लेने से ही अपनी जिंदगी गुलजार है”. अनेक बधाई ! मीनाक्षी श्रीवास्तव

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 24, 2013

    आपकी सार्थक प्रतिक्रया हेतु शुभकामनाओं सहित हार्दिक साभार धन्यबाद

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 24, 2013

    प्रतिक्रया हेतु शुभकामनाओं सहित हार्दिक साभार धन्यबाद

Alka के द्वारा
October 23, 2013

आदरणीय मदन जी , क्या खूब लिखा है | सुन्दर रचना .. बधाई ..

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 23, 2013

    शुक्रिया होंसला अफजाई के लिए.

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
October 21, 2013

गर कोई हमसे कहे की रूप कैसा है खुदा का हम यकीकन ये कहेंगे जिस तरह से यार है वाह क्या बात कही आपने /

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 21, 2013

    Thanks Rajesh kumar srivastavaji

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
October 21, 2013

गर कोई हमसे कहे की रूप कैसा है खुदा का हम यकीकन ये कहेंगे जिस तरह से यार है वाह ! क्या बात कही आपने / बहुत खूब /

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 21, 2013

    होंसला अफजाई के लिए शुक्रिया .

bdsingh के द्वारा
October 19, 2013

बहुत सुन्दर रचना।

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    October 21, 2013

    बहुत शुक्रिया होंसला अफजाई के लिए.


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