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दर्दे दिल

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दर्दे दिल

जाना जिनको कल अपना आज हुए बह पराये हैं
दुनिया के सारे गम आज मेरे पास आए हैं

ना पीने का है आज मौसम ,ना काली सी घटाए हैं
आज फिर से नैनो में क्यों अश्क बहके आए हैं

रोशनी से आशियाना यारों अक्सर जलता है
अँधेरा मेरे मन को आज खूब ज्यादा भाए है

जब जब देखा मैंने दिल को,ये मुस्कराके कहता है
और जगह बाक़ी है, जख्म कम ही पाए हैं

अब तो अपनी किस्मत पर रोना भी नहीं आता
दर्दे दिल को पास रखकर हम हमेशा मुस्कराए हैं

प्रस्तुति :
मदन मोहन सक्सेना

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjeevtrivedi के द्वारा
January 14, 2014

और जगह बाकी है जख्म कम ही खायें है क्या खूब लिखा है…

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    January 15, 2014

    मेरे ब्लौग आप का स्वागत है , आभारी हूँ !

sanjeevtrivedi के द्वारा
January 14, 2014

और जगह बाकी है जख्म कम ही खाये है बहुत खूब लिखा है 

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 13, 2014

भाई मदन जी , सादर !खूब लिखिए खूब मँजिये ! शुभकामनाओं सहित !!


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