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प्यार की बातें प्यार से (contest)

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बसंत के महीने में हर जगह प्रेम की चर्चा हो रही है . आज कल सच्चा प्यार किसे मिलता है कहना मुश्किल है . भक्त भगबान से प्यार मन्नत के लिए कर रहा है .पति पत्नी ,माँ बेटा, दोस्त दोस्त ,रिश्तेदारी की बुनियाद मूलता प्यार पर ही टिकी हुई है.प्यार के इस मौसम और मौके पर कुछ कबिता तो बनती ही हैं .

एक

प्यार के गीत जब गुनगुनाओगे तुम ,उस पल खार से प्यार पाओगे तुम
प्यार दौलत से मिलता नहीं है कभी ,प्यार पर हर किसी का अधिकार है

प्यार रामा में है प्यारा अल्लाह लगे ,प्यार के सूर तुलसी ने किस्से लिखे
प्यार बिन जीना दुनिया में बेकार है ,प्यार बिन सूना सारा ये संसार है

प्यार पाने को दुनिया में तरसे सभी, प्यार पाकर के हर्षित हुए है सभी
प्यार से मिट गए सारे शिकबे गले ,प्यारी बातों पर हमको ऐतबार है

प्यार से अपना जीवन सभारों जरा ,प्यार से रहकर हर पल गुजारो जरा
प्यार से मंजिल पाना है मुश्किल नहीं , इन बातों से बिलकुल न इंकार है

प्यार के किस्से हमको निराले लगे ,बोलने के समय मुहँ में ताले लगे
हाल दिल का बताने जब हम मिले ,उस समय को हुयें हम लाचार हैं

प्यार से प्यारे मेरे जो दिलदार है ,जिनके दम से हँसीं मेरा संसार है
उनकी नजरो से नजरें जब जब मिलीं,उस पल को हुए उनके दीदार हैं

प्यार जीवन में खुशियाँ लुटाता रहा ,भेद आपस के हर पल मिटाता रहा
प्यार जीवन की सुन्दर कहानी सी है ,उस कहानी का मदन एक किरदार है

दो
प्यार पाना चाहता हूँ प्यार पाना चाहता हूँ

प्यार पतझड़ है नहीं फूलों भरा मधुमास है
तृप्ती हो मन की यहाँ ऐसी अनोखी प्यास है
प्यार के मधुमास में साबन मनाना चाहता हूँ
प्यार पाना चाहता हूँ प्यार पाना चाहता हूँ

प्यार में खुशियाँ भरी हैं प्यार में आंसू भरे
या कि दामन में संजोएँ स्वर्ण के सिक्के खरे
प्यार के अस्तित्ब को मिटते कभी देखा नहीं
प्यार के हैं मोल सिक्कों से कभी होते नहीं
प्यार पाना चाहता हूँ प्यार पाना चाहता हूँ

प्यार दिल की बाढ़ है और मन की पीर है
बेबसी में मन से बहता यह नयन का तीर है
प्यार है भागीरथी और प्यार जीवन सारथी
प्यार है पूजा हमारी प्यार मेरी आरती
प्यार से ही स्बांस की सरगम बजाना चाहता हूँ
प्यार पाना चाहता हूँ प्यार पाना चाहता हूँ

तीन
खुदा के नाम से पहले हम उनका नाम लेते हैं

खुदा का नाम लेने में तो हमसे देर हो जाती.
खुदा के नाम से पहले हम उनका नाम लेते हैं..

पाया है सदा उनको खुदा के रूप में दिल में
उनकी बंदगी कर के खुदा को पूज लेते हैं..

न मंदिर में न मस्जिद में न गिरजा में हम जाते हैं
जब नजरें चार उनसे हो ,खुदा के दर्श पाते हैं

खुदा का नाम लेने में तो हमसे देर हो जाती.
खुदा के नाम से पहले हम उनका नाम लेते हैं..

मदन मोहन सक्सेना

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25 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

रमेश भाई आँजना के द्वारा
February 17, 2014

ेसुंदर….मदनजी  ,,,,बहुत खुब

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 17, 2014

    आप का बहुत शुक्रिया होंसला अफजाई के लिए.”

deepakbijnory के द्वारा
February 16, 2014

कमाल का लेखन

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 17, 2014

    धन्यवाद !,प्रतिक्रिया मिली बहुत अच्छा लगा।

aman kumar के द्वारा
February 12, 2014

काफी समय बाद आपकी रचना पड़ने को मिली , बहुतप्यार है आपके दिल में . आभार

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 12, 2014

    धन्यवाद ! प्रतिक्रिया मिली बहुत अच्छा लगा।

yogi sarswat के द्वारा
February 10, 2014

प्यार पाना चाहता हूँ प्यार पाना चाहता हूँ प्यार पतझड़ है नहीं फूलों भरा मधुमास है तृप्ती हो मन की यहाँ ऐसी अनोखी प्यास है प्यार के मधुमास में साबन मनाना चाहता हूँ प्यार पाना चाहता हूँ प्यार पाना चाहता हूँ प्यार में खुशियाँ भरी हैं प्यार में आंसू भरे या कि दामन में संजोएँ स्वर्ण के सिक्के खरे प्यार के अस्तित्ब को मिटते कभी देखा नहीं प्यार के हैं मोल सिक्कों से कभी होते नहीं प्यार पाना चाहता हूँ प्यार पाना चाहता हूँ प्यार दिल की बाढ़ है और मन की पीर है बेबसी में मन से बहता यह नयन का तीर है प्यार है भागीरथी और प्यार जीवन सारथी प्यार है पूजा हमारी प्यार मेरी आरती प्यार से ही स्बांस की सरगम बजाना चाहता हूँ सुन्दर भावों की अभिव्यक्ति . आभार

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 10, 2014

    प्रतिक्रिया मिली बहुत अच्छा लगा। धन्यवाद !

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
February 8, 2014

मदन मोहन जी बहुत अंतराल से दर्शन हुए क्या कहीं प्यार व्यार मैं डूब गए थे गोपियों ने कैसे बिदा कर दिया उद्धव तो फिर वापस ना ले जायेंगे ओम शांति शांति शांति 

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 10, 2014

    आपका हृदयसे आभार .

Aniruddha Sharma के द्वारा
February 8, 2014

सुंदर रचनाएँ। बधाई।

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 10, 2014

    आपकी प्यार भरी, उत्साह बढ़ाने वाली प्रतिक्रिया मिली बहुत अच्छा लगा। धन्यवाद !

aartisharma के द्वारा
February 7, 2014

वाह आपने तो पंक्तियों को प्रेमरस से सराबोर कर कर दिया मदन मोहन जी..बधाई

aartisharma के द्वारा
February 7, 2014

वाह,आपने तो पंक्तियों को प्रेमरस से सरोबार कर दिया मदन मोहन जी..हार्दिक बधाई…

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 7, 2014

    आभारी हूँ !सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है ,

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
February 6, 2014

सुन्दर भावों की अभिव्यक्ति . आभार

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 6, 2014

    आभार.आप का स्वागत है

sanjay kumar garg के द्वारा
February 5, 2014

“प्यार अपना ईमान होता है, प्यार ईश्वर का नाम होता है, मंजिले खुदबखुद मिल जाती हैं, प्यार ऐसा मुकाम होता है!” अच्छी रचना के लिए बधाई! मदन मोहन जी!

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 5, 2014

    प्रोत्साहन के लिए आपका हृदयसे आभार . मेरे ब्लौग आप का स्वागत है .

sadguruji के द्वारा
February 5, 2014

बहुत सार्थक उपयोगी और शिक्षाप्रद रचना.आपको बधाई और कांटेस्ट के लिए शुभकामनाएं.

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 5, 2014

    प्रोत्साहन के लिए आपका हृदयसे आभार .

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 5, 2014

    सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है .हृदयसे आभार

jlsingh के द्वारा
February 5, 2014

सुन्दर अभिव्यक्ति आदरणीय मदन मोहन जी आप तो मदन भी हो और मोहन भी, कामदेव अनंग हो तुम, तुम्ही कृष्ण मुरारी भी!

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    February 5, 2014

    प्रोत्साहन के लिए आपका हृदयसे आभार . सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है .


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