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ग़ज़ल(सच्ची और दिल की बात)

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ग़ज़ल(सच्ची और दिल की बात)

किसको आज फुर्सत है किसी की बात सुनने की
अपने ख्बाबों और ख़यालों में सभी मशगूल दिखतें हैं

दुनिया में जिधर देखो हज़ारों रास्ते दीखते
मंजिल जिनसे मिल जाये बह रास्ते नहीं मिलते हैं

सबक क्या क्या सिखाता है जीबन का सफ़र यारों
मुश्किल में बहुत मुश्किल से अपने दोस्त दिखतें हैं

क्यों सच्ची और दिल की बात ख़बरों में नहीं दिखती
नहीं लेना हक़ीक़त से और मन से आज लिखतें हैं

धर्म देखो कर्म देखो असर दीखता है पैसों का
भरोसा हो तो किस पर हो सभी इक जैसे दिखतें हैं

सियासत में न इज्ज़त की न मेहनत की कद्र यारों
सुहाने स्वप्न और ज़ज्बात यहाँ हर रोज बिकते हैं

प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    March 27, 2014

    बहुत बहुत धन्यवाद .आभार .

Aakash Tiwaari के द्वारा
March 23, 2014

सियासत गहरी है मगर गहराई का अंदाजा है क्या, मिटा देता है सब कुछ इसमें रिश्तों की मर्यादा है क्या, ज़मीदोज़ हो गयी हस्तियां हौसले भी पस्त हो गए, न खोज सके कभी इनका कोई विश्लेषण है क्या.. =आकाश तिवारी=

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    March 24, 2014

    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .आशा है आगे भी आपका आशीर्वाद मेरी रचनाओं को मिलता रहेगा .आभार .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 21, 2014

सियासत में न इज्जत की न महनत की कद्र यारो ,सुहाने स्वप्न और जज्वात यहाँ हर रोज़ बिकते हैं ,मुझे ये पंक्तियाँ बहुत सुंदर लगीं ,उम्दा ख्याल ,सादर बधाई मदनजी .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 21, 2014

सियासत में न इज्जत की न मेहनत की कद्र यारो ,सुहाने स्वप्न और जज्वात यहाँ हर रोज़ बोकते हैं ,ये पंक्तिया मुझे बहुत अच्छी लगीं मदन जी , उम्दा रचना सादर बधाई

sanjay kumar garg के द्वारा
March 21, 2014

अच्छी अभिव्यक्ति सक्सेना ji!

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    March 21, 2014

    आभार आपका प्रतिक्रिया के लिए


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