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मेरा मन सोचता है कि

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मेरा मन सोचता है कि

आज जब आया भूकंप
नेपाल में पुरे उत्तर प्रदेश में
अचानक प्राकतिक दुर्घटना घटी
उसी पल जमीन फटी
सजे सम्भरें सुसज्जित गृह खँडहर में बदल गये
शमशान गृह में ही सारे शहर ही बदल गये
मेरा मन सोचता है कि

ये चुपचाप सा लेता हुआ युबा कौन है
क्या सोचता है और क्यों मौन है
ये शायद अपनें बिचारों में खोया है
नहीं नहीं लगता है ,ये सोया है
इसे लगता नौकरी कि तलाश है
अपनी योग्यता का इसे बखूबी एहसास है
सोचता था कि कल सुबह जायेंगें
योग्यता के बल पर उपयुक्त पद पा जायेंगें
पर अचानक जब आया भूकंप
मन कि आशाएं बेमौसम ही जल गयीं
धरती ना जानें क्यों इस तरह फट गयी
मेरा मन सोचता है कि
ये बृद्ध पुरुष किन विचारों में खोया है
आँखें खुली हैं किन्तु लगता है सोया है
इसने सोचा था कि
कल जब अपनी बेटी का ब्याह होगा
बर्षों से संजोया सपना तब पूरा होगा
उसे अपने ही घर से
अपने पति के साथ जाना होगा
अपने बलबूते पर घर को स्वर्ग जैसा बनाना होगा
पर अचानक जब आया भूकंप
मन कि आशाएं बेमौसम ही जल गयीं
धरती ना जानें क्यों इस तरह फट गयी
मेरा मन सोचता है कि
ये बालक तो अब बिलकुल मौन है
इस बच्चे का संरछक न जाने कौन है
लगता है कि
मा ने बेटे को प्यार से बताया है
बेटे को ये एतबार भी दिलाया है
कल जब सुबह होगी
सूरज दिखेगा और अँधेरा मिटेंगा
तब हम बाहर जायेंगें
और तुम्हारे लिए
खूब सारा दूध ले आयेंगें
शायद इसी एहसास में
दूध मिलने कि आस में
चुपचाप सा मुहँ खोले सोया है
शांत है और अब तलक न रोया है
पर अचानक जब आया भूकंप
मन कि आशाएं बेमौसम ही जल गयीं
धरती ना जानें क्यों इस तरह फट गयी

मेरा मन सोचता है कि
ये नबयौब्ना चुपचाप क्यों सोती है
न मुस्कराती है और न रोती है
सोचा था कि ,कल जब पिया आयेंगें
बहुत दिनों के बाद मिल पायेंगें
जी भर के उनसे बातें करेंगें
प्यार का एहसास साथ साथ करेंगें
पर अचानक जब आया भूकंप
मन कि आशाएं बेमौसम ही जल गयीं
धरती ना जानें क्यों इस तरह फट गयी

मेरा मन सोचता है कि
आखिर क्यों ?
युबक ,बृद्ध पुरुष ,बालक,नबयौबना पर
अचानक ये कौन सा कहर बरपा है
किन्तु इन सब बातों का
किसी पर भी, कुछ नहीं हो रहा असर
बही रेडियो ,टीवी का संगीतमय शोर
घृणा ,लालच स्वार्थ की आजमाइश और जोर
मलबा ,टूटे हुयें घर ,स्त्री पुरुषों की धेर सारी लाशें
बिखरतें हुयें सपनें और सिसकती हुईं आसें
इन सबको देखने और सुनने के बाद
भोगियों को दिए गये बही खोखले बादे
अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिये
कार्य करने के इरादे
बही नेताओं के जमघतो का मंजर
आश्बास्नों में छिपा हुआ घातक सा खंजर

मेरा मन सोचता है कि
आखिर ऐसा क्यों हैं कि
क्या इसका कोई निदान नहीं है
आपसी बैमन्सय नफरत स्वार्थपरता को देखकर
एक बार फिर अपनी धरती माँ कापें
इससे पहले ही हम सब
आइए
हम सब आपस में साथ हो
भाईचारे प्यार कि आपस में बात हो
ताकि
युबक ,बृद्ध पुरुष ,बालक,नबयौबना
सभी के सपनें और पुरे अरमान हों
सारी धरती पर फिर से रोशन जहान हो …….

प्रस्तुति :
मदन मोहन सक्सेना



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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Alka के द्वारा
March 2, 2016

आदरणीय मदनमोहन जी . भूकम्प का सजीव चित्रण साथ हो इतने भावोंएक साथ को बहुत ही सुन्दरता से व्यक्त किया है आपने की मन भावुक हो गया .. बधाई

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    March 4, 2016

    शुक्रिया अलका जी आपका तहे दिल से हौसला अफजाई के लिए

ashokkumardubey के द्वारा
June 1, 2015

बहुत प्रेरणादायी , असलियत को बयां करती हुयी आपकी यह कविता सराहनीय है

Maharathi के द्वारा
May 20, 2015

श्री मदन मोहन सक्सैना जी। गजब की कल्पना दूध मिलने कि आस में चुपचाप सा मुँह खोले सोया है। दिल को हिला दिया। माफ कीजिए शब्द छोटे हैं। बारम्बार धन्यवाद। अवधेश किशोर शर्मा ‘महारथी’ वृन्दावन, मथुरा (उ.प्र.) +919319261067

sadguruji के द्वारा
April 30, 2015

आदरणीय सुन्दर और विचारणीय कविता ! बहुत बहुत अभिनन्दन और बधाई !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    May 1, 2015

    प्रोत्साहन के लिए आपका हृदयसे आभार . सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है .

Shobha के द्वारा
April 29, 2015

श्री मदन जी आशा वाद —– मा ने बेटे को प्यार से बताया है बेटे को ये एतबार भी दिलाया है कल जब सुबह होगी सूरज दिखेगा और अँधेरा मिटेंगा तब हम बाहर जायेंगें साड़ी कविता बहुत सुंदर है डॉ शोभा

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    May 1, 2015

    आपका हृदयसे आभार . सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है .

Shobha के द्वारा
April 27, 2015

श्री मदन मोहन जी वास्तविकता के करीब कविता क्या इसका कोई निदान नहीं है आपसी बैमन्सय नफरत स्वार्थपरता को देखकर एक बार फिर अपनी धरती माँ कापें इससे पहले ही हम सब आइए बहुत अच्छे विचार धरती भी जनसंख्या के बोझ के तले थक चुकी है शोभा

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    May 1, 2015

    आपकी सार्थक प्रतिक्रया हेतु आप का हार्दिक साभार ,धन्यबाद ……


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