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दिखे बदले हुए चेहरे

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दिखे बदले हुए चेहरे

बदलते बक्त में मुझको दिखे बदले हुए चेहरे
माँ का एक सा चेहरा , मेरे मन में पसर जाता

नहीं देखा खुदा को है ना ईश्वर से मिला मैं हुँ
मुझे माँ के ही चेहरे मेँ खुदा यारों नजर आता

मुश्किल से निकल आता, करता याद जब माँ को
माँ कितनी दूर हो फ़िर भी दुआओं में असर आता

उम्र गुजरी ,जहाँ देखा, लिया है स्वाद बहुतेरा
माँ के हाथ का खाना ही मेरे मन में उतर पाता

खुदा तो आ नहीं सकता ,हर एक के तो बचपन में
माँ की पूज ममता से अपना जीबन , ये संभर जाता

जो माँ की कद्र ना करते ,नहीं अहसास उनको है
क्या खोया है जीबन में, समय उनका ठहर जाता

मदन मोहन सक्सेना



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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
May 1, 2015

अति सुन्दर अभिवयक्ति, माँ ही तो भगवान है, “माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी” ! बहुत सारी बधाइयां मदन मोहन जी हरेन्द्र जागते रहो !

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    May 10, 2015

    हार्दिक साभार ,धन्यबाद ……

Sushma Gupta के द्वारा
June 24, 2014

माँ का एक सा चेहरा , मेरे मन में पसर जाता नहीं देखा खुदा को है ना ईश्वर से मिला मैं हुँ मुझे माँ के ही चेहरे मेँ खुदा यारों नजर आता मुश्किल से निकल आता, करता याद जब माँ को माँ कितनी दूर हो फ़िर भी दुआओं में असर आता बहुत खूव, माँ के प्रति बहुत ही सुन्दर जज्वात हैं , मदन मोहन जी वधाई…

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    June 24, 2014

    आपकी सराहना मेरे लिये किसी पुरस्कार से कम नहीं है…..तहे दिल से आपका शुक्रगुजार हूँ, हार्दिक आभार

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    June 20, 2014

    बहुत बहुत आभार रचना का अब्लोकन करने के लिए

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    June 24, 2014

    तहे दिल से आपका शुक्रगुजार हूँ, हार्दिक आभार

pkdubey के द्वारा
June 20, 2014

बहुत सारगर्भित रचना सर.सब के चेहरे बदल सकते हैं .पर माँ का चेहरा नहीं बदलता.सादर बधाई.

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    June 20, 2014

    ह्रदय से धन्यवाद

sanjeevtrivedi के द्वारा
June 15, 2014

सुन्दर पंक्तियाँ मदन जी…

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    June 16, 2014

    आप का स्वागत है .ह्रदय से धन्यवाद

sanjeevtrivedi के द्वारा
June 15, 2014

मदन मोहन जी सुन्दर रचना है…

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    June 16, 2014

    प्रतिक्रियार्थ आभारी हूँ ! सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है !!

deepak pande के द्वारा
June 14, 2014

जो माँ की कद्र ना करते ,नहीं अहसास उनको है क्या खोया है जीबन में, समय उनका ठहर जाता maa kee क़द्र करने वाला ही वास्तव में इंसान है

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    June 16, 2014

    अनेकानेक धन्यवाद सकारात्मक टिप्पणी हेतु.


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