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दर्दे दिल

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दर्दे दिल

जाना जिनको कल अपना आज हुए बह पराये हैं
दुनिया के सारे गम आज मेरे पास आए हैं

ना पीने का है आज मौसम ,ना काली सी घटाए हैं
आज फिर से नैनो में क्यों अश्क बहके आए हैं

रोशनी से आशियाना यारों अक्सर जलता है
अँधेरा मेरे मन को आज खूब ज्यादा भाए है

जब जब देखा मैंने दिल को,ये मुस्कराके कहता है
और जगह बाक़ी है, जख्म कम ही पाए हैं

अब तो अपनी किस्मत पर रोना भी नहीं आता
दर्दे दिल को पास रखकर हम हमेशा मुस्कराए हैं

प्रस्तुति :
मदन मोहन सक्सेना



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjeevtrivedi के द्वारा
June 19, 2015

बहुत सुन्दर मदन मोहन जी…जख्म खाकर मुस्कुराता है …

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    June 22, 2015

    आपकी प्यार भरी, उत्साह बढ़ाने वाली प्रतिक्रिया मिली बहुत अच्छा लगा। धन्यवाद !

ashasahay के द्वारा
June 19, 2015

सुन्दर प्रस्तुति बधाई आशा सहाय

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    June 22, 2015

    आपका हृदयसे आभार . आप का स्वागत है .

ashasahay के द्वारा
June 19, 2015

सुन्दर प्रस्तुति है। बधाई। आशा सहाय।

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    June 22, 2015

    प्रोत्साहन के लिए आपका हृदयसे आभार . सदैव मेरे ब्लौग आप का स्वागत है .


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