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ग़ज़ल (मुसीबत यार अच्छी है)

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मुसीबत यार अच्छी है पता तो यार चलता है
कैसे कौन कब कितना, रंग अपना बदलता है

किसकी कुर्बानी को किसने याद रक्खा है दुनिया में
जलता तेल और बाती है कहते दीपक जलता है

मुहब्बत को बयाँ करना किसके यार बश में है
उसकी यादों का दिया अपने दिल में यार जलता है

बैसे जीवन के सफर में तो कितने लोग मिलते हैं
किसी चेहरे पे अपना दिल अभी भी तो मचलता है

समय के साथ बहने का मजा कुछ और है यारों
रिश्तें भी बदल जाते समय जब भी बदलता है

मुसीबत यार अच्छी है पता तो यार चलता है
कैसे कौन कब कितना, रंग अपना बदलता है

ग़ज़ल (मुसीबत यार अच्छी है)

मदन मोहन सक्सेना



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
June 21, 2015

श्री मदन जी भाव पूर्ण गजल

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    June 22, 2015

    शुक्रिया शोभा जी प्रतिक्रिया के लिए

sanjeevtrivedi के द्वारा
June 19, 2015

मदन मोहन जी सुन्दर गजल…

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    June 22, 2015

    बहुत बहुत आभार संजीवजी

sanjeevtrivedi के द्वारा
June 19, 2015

मदन मोहन जी बहुत ही सुन्दर गजल…

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    June 22, 2015

    शुक्रिया ब्लॉग पर आने के लिए

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
June 19, 2015

आदरणीय मदन मोहन जी, आपकी गजल ” मुसीबत यार अच्छी  है ”  पढी । बहुत सुंदर लेखा है आपने । जिंदगी के सच को गजल रूप मे बहुत ही खूबसूरत तरीके से ढाला है आपने ।, दिल को अच्छी लगी । यूं ही लिखते रहें ।

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    June 22, 2015

    शुक्रिया हौसलाअफजाई के लिए , ऐसे ही अपना स्नेह देते रहें


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