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चंद शेर आपके लिए

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चंद शेर आपके लिए

एक।

दर्द मुझसे मिलकर अब मुस्कराता है
जब दर्द को दबा जानकार पिया मैंने

दो.

वक्त की मार सबको सिखाती सबक़ है
ज़िन्दगी चंद सांसों की लगती जुआँ है

तीन.

समय के साथ बहने का मजा कुछ और है यारों
रिश्तें भी बदल जाते समय जब भी बदलता है

चार.

जब हाथों हाथ लेते थे अपने भी पराये भी
बचपन यार अच्छा था हँसता मुस्कराता था

प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
February 29, 2016

जब हाथों हाथ लेते थे अपने भी पराये भी बचपन यार अच्छा था हँसता मुस्कराता था………..वैसे तो आपके सभी शेर अच्छे हैं लेकिन यह दिल के अधिक करीब है । यूं ही लिखते रहें । सादर्

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    March 1, 2016

    शुक्रिया आपका

ashasahay के द्वारा
February 27, 2016

काफी अच्छा शेर है ।ये जीवन की भवनात्मक सच्चाईयाँ हैं। बहुत अच्छी अभिव्यक्ति है।

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    March 1, 2016

    आप का बहुत शुक्रिया होंसला अफजाई के लिए.


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