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अब तो आ कान्हा जाओ, इस धरती पर सब त्रस्त हुए ( कृष्ण जन्माष्टमी बिशेष)

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अब तो आ कान्हा जाओ, इस धरती पर सब त्रस्त हुए
दुःख सहने को भक्त तुम्हारे आज सभी अभिशप्त हुए
नन्द दुलारे कृष्ण कन्हैया ,अब भक्त पुकारे आ जाओ
प्रभु दुष्टों का संहार करो और प्यार सिखाने आ जाओ

अर्थ का अनर्थ

एक रोज हम यूँ ही बृन्दावन गये
भगबान कृष्ण हमें बहां मिल गये
भगवान बोले ,बेटा मदन क्या हाल है ?
हमने कहा दुआ है ,सब मालामाल हैं

कुछ देर बाद हमने ,एक सवाल कर दिया
भगवान बोले तुमने तो बबाल कर दिया
सवाल सुन करके बो कुछ लगे सोचने
मालूम चला ,लगे कुछ बह खोजने

हमने उनसे कहा ,ऐसा तुमने क्या किया ?
जिसकी बजह से इतना नाम कर लिया
कल तुमने जो किया था ,बह ही आज हम कर रहे
फिर क्यों लोग , हममें तुममें भेद कर रहे

भगवान बोले प्रेम ,कर्म का उपदेश दिया हमनें
युद्ध में भी अर्जुन को सन्देश दिया हमनें
जब कभी अपनों ने हमें दिल से है पुकारा
हर मदद की उनकी ,दुष्टों को भी संहारा

मैनें उनसे कहा सुनिए ,हम कैसे काम करते है
करता काम कोई है ,हम अपना नाम करते हैं
देखकर के दूसरों की माँ बहनों को ,हम अपना बनाने की सोचा करते
इसी दिशा में सदा कर्म किया है, कल क्या होगा ,ये ना सोचा करते

माता पिता मित्र सखा आये कोई भी
किसी भी तरह हम डराया करते
साम दाम दण्डं भेद किसी भी तरह
रूठने से उनको मनाया करते

बात जब फिर भी नहीं है बनती
कर्म कुछ ज्यादा हम किया करतें
सजा दुष्टों को हरदम मिलती रहे
ये सोचकर कष्ट हम दिया करते

मार काट लूट पाट हत्या राहजनी
अपनें हैं जो ,मर्जी हो बो करें
कहना तो अपना सदा से ये है
पुलिस के दंडें से फिर क्यों डरे

धोखे से जब कभी बे पकड़े गए
पल भर में ही उनको छुटाया करते
जब अपनें है बे फिर कष्ट क्यों हो
पल भर में ही कष्ट हम मिटाया करते

ये सुनकर के भगबान कहने लगे
क्या लोग दुनियां में इतना सहने लगे
बेटा तुने तो अर्थ का अनर्थ कर दिया
ऐसे कर्मों से जीवन अपना ब्यर्थ कर दिया

तुमसे कह रहा हूँ मैं हे पापी मदन
पाप अच्छे कर्मों से तुमको डिगाया करेंगें
दुष्कर्मों के कारण हे पापी मदन
हम तुम जैसों को फिर से मिटाया करेंगें

अर्थ का अनर्थ (अब तो आ कान्हा जाओ)
अब तो आ कान्हा जाओ, इस धरती पर सब त्रस्त हुए
( कृष्ण जन्माष्टमी बिशेष)

मदन मोहन सक्सेनाjanmastami

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
August 23, 2016

जय श्री राम मदन मोहन जी सबसे पहले जन्माष्टमी की अगिम शुभकामनाएंऍभगवान् कृष्णा ने जो कहा हमें वो करना चाइये.दुर्भ्ग्यवश हम लोग जन्माष्टमी तो मानते भगवान् का जन्मदिन मानते झाकी सजाते लेकिन उनके गीता के उपदेशो को नहीं मानते.लेकिन पच्छिम देश जन्म नहीं मानते लेकिन उनके उपदेश जरूर मानते.वे लोग कर्म संस्कृति पर विस्वास कर गंभीरता से लेते और आतंकवादी दुस्तो को नहीं छोड़ते जबकि हमारे याहन कार्य की कोइ बात नहीं करता अदिकारो के नाम पर वेतन वृद्धि की मांग कर देश को लूटना चाहते और आतंकवादियो की फांसी पर रोते और देर रात तक अदालत का समय बर्बाद करते.नैतिकता जो भारतीय मूल्य था ख़तम हो गयी भौतिकवादिता आ गयी.सुन्दर कविता के माध्यम से भगवान् कृष्णा का सन्देश देने के लिए आभार.

    Madan Mohan saxena के द्वारा
    August 24, 2016

    शुक्रिया आपका


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