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श्री कृष्णजन्माष्टमी का पर्ब आप सबको मंगलमय हो

Posted On: 25 Aug, 2016 कविता में

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उत्थान पतन मेरे भगवन है आज तुम्हारे हाथों में

प्रभु जीत तुम्हारें हाथों में प्रभु हार तुम्हारें हाथों में

मुझमें तुममें है फर्क यही मैं नर हूँ तुम नारायण हो

मैं खेलूँ जग के हाथों में संसार तुम्हारें हाथों में

तुम दीनबंधु दुखहर्ता हो तुम जग के पालन करता हो

इस मुर्ख खल और कामी का उद्धार तुम्हारे हाथों में

मेरे तन मन के तुम स्वामी हो भगवन तुम अंतर्यामी हो

मेरे जीवन की इस नौका का प्रभु भार तुम्हारे हाथों में

तुम भक्तों के रखबाले हो दुःख दर्द मिटाने बाले हो

तेरे चरणों में मुझे जगह मिले अधिकार तुम्हारे हाथों में

श्री कृष्णजन्माष्टमी का पर्ब आप सबको मंगलमय हो

मदन मोहन सक्सेना

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
August 26, 2016

जय श्री राम मदन मोहन जी  कविता के नाध्यम से बहुत अच्छी भावना व्यक्त की हम लोगो जन्माष्टमी मानते परंती कर्तव्यों के प्रति बहुत उदासीन है भगवान् कृष्णा राष्ट्र को सम्पन्नता प्रदान करते बाहरी और आतंरिक दुश्मनों का सफाया करे.भगवान् कृष्णा ने गीता में जो कहा हमें वही करना चाइये.जनमाष्टमी की शुभकामनाये.


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