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दोस्त अपने आज सब क्यों बेगाने लगते हैं

Posted On: 19 Sep, 2017 कविता में

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Mukhote


जब अपने चेहरे से नकाब हम हटाने लगते हैं,
अपने चेहरे को देखकर डर जाने लगते हैं।

वह हर बात को मेरी क्यों दबाने लगते हैं,
जब हकीकत हम उनको समझाने लगते हैं।

जिस गलती पर हमको वह समझाने लगते हैं,
वही गलती को फिर वह दोहराने लगते हैं।

आज दर्द खिचकर मेरे पास आने लगते हैं,
शायद दर्द से मेरे रिश्ते पुराने लगते हैं।

दोस्त अपने आज सब क्यों बेगाने लगते हैं,
मदन दुश्मन आज सारे जाने पहचाने लगते हैं।

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