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भरोसा टूटने पर यार सब कुछ टूट जाता है

Posted On: 10 Oct, 2017 कविता में

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भरोसा है तो रिश्तें हैं ,रिश्तें हैं तो खुशहाली
भरोसा टूटने पर यार सब कुछ टूट जाता है

यारों क्यों लगा करतें हैं दुश्मन जैसे अपने भी
किसी के यार जीबन में समय जब रूठ जाता है

समय की माँग है यारों रिश्तों को समय देना
अनदेखी में लगाया पौधा अक्सर सूख जाता है

बुरा कोई नहीं होता बुरे हालात होते हैं
दो पैसों के खातिर अपनों का साथ छूट जाता हैं

गज़ब हैं लोग दुनिया के गज़ब हैं रंग दुनिया के
जिसकी जब जरुरत हो तब ही रूठ जाता है

समय के साथ चलना क्यों बहुत मुश्किल हुआ करता
मदन जीबन यार बुलबुला है आखिर फूट जाता है

मदन मोहन सक्सेना

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Alka के द्वारा
October 10, 2017

आदरणीय मदन मोहन जी , आपका नाम गलत प्रिंट हो गया | SORRY

Alka के द्वारा
October 10, 2017

आदरणीय मनमोहन जी , बहुत खूब रचना | सच कहा है , जिसकी जब जरुरत हो तब ही रूठ जाते हैं…. बधाई


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